MTNL की घंटी - 4

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प्लीज़… बस आप एक काम कर दीजिए… कान्हा के कान पर रिसीवर रख दीजिए… आप सुन रहे हैं ना?”महक लगभग चीख पड़ी थी। उसकी आवाज़ में उतावलापन भी था और ममता भी।देव कुछ पल चुप रहा… फिर गहरी साँस लेकर बोला—“ठीक है… रखता हूँ।”बहुत मुश्किल से उसने रिसीवर उठाया और काँपते हाथों से कान्हा के कान के पास ले गया।दूसरे हाथ से उसने कान्हा को अपने सीने से कसकर लगाया हुआ था… जैसे टूटते हुए पल को थाम रहा हो।महक ने बिना एक पल गँवाए गाना शुरू कर दिया—“यशोमती मैया से बोले नंदलाला…राधा क्यों गोरी… मैं क्यों काला…”उसकी आवाज़ फोन