श्रव्या अपनी टेबल पर बैठी है लेकिन उसका मन काम में नहीं है। दिमाग में वही बात घूम रही है।श्रव्या (सोचते हुए, बैकग्राउंड आवाज़ में) बोली - जब मैंने पहले दिन बिल्डिंग के बाहर से देखा था... तो 9th फ्लोर पर एक लड़की किसी लड़के के साथ खड़ी थी... तो क्या वो प्रिशा थी? और वो लड़का... संतोष?वो खिड़की से ऊपर देखती है, 9th फ्लोर के शीशों पर हल्की सी धूप पड़ रही है। अंदर अंधेरा।श्रव्या (धीरे से खुद से) बोली - मुझे खुद देखना होगा... आखिर इस मंज़िल में ऐसा क्या राज़ है...।घड़ी देखती है — दोपहर का 1:30 बजा है।