लेखक - एसटीडी मौर्य ️कटनी मध्य प्रदेश भारत जैसे ही हम कमरे में पहुँचे, मैंने उत्साहित होकर कहा—“अरे अंकिता! देखो… मम्मी को होश आ गया है!”अंकिता खुशी से बोली—“हाँ भैया… अब मम्मी ठीक हैं।”हम तीनों तुरंत मम्मी के पास जाकर बैठ गए।अंकिता मम्मी के पैरों को दबाने लगी,और प्रियांशी मम्मी के सिर में हल्के-हल्के तेल लगाने लगी।मम्मी बोलीं—“अरे बेटी, रहने दो… मैं अब ठीक हूँ, सिर पर तेल मत लगाओ।”प्रियांशी मुस्कुराकर बोली—“नहीं आंटी जी, आप अभी ठीक नहीं हैं… आप बस आराम कीजिए।”मम्मी फिर बोलीं—“अरे बेटी, रहने दो… अंकिता ही कर देगी। तुम कर रही हो, अच्छा नहीं लगता।”प्रियांशी हल्का सा