MTNL की घंटी - 2

(1.2k)
  • 3.6k
  • 1.5k

14 नवंबर की सुबह थी।घर में रौनक थी... चहल-पहल थी... और एक खास चमक — जैसे सच में लक्ष्मी जी इस घर में पधार चुकी हों।महक आज कुछ अलग ही लग रही थी —लाल रंग की चूड़ियाँ, माथे पर छोटी-सी बिंदी, लाल साड़ी और पैरों में पायल की रुनझुन।वो घर की छोटी बहू होते हुए भी आज पूरे घर पर राज कर रही थी — हर एक जिम्मेदारी बखूबी संभाल रही थी।खुद कम कर रही थी, लेकिन सबको लगन से काम में लगाए हुए थी।सास मंदिर गई थीं,पापा-बेटी दोनों पटाखे और मिठाई लेने बाजार जा चुके थे,और ताई जी —