चुपके-चुपके आऊँगा - भाग 8

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लेखक - एसटीडी मौर्य ️कटनी मध्य प्रदेश ट्रेन से उतरने के बाद हम लोग स्टेशन के बाहर ऑटो पकड़ने के लिए पार्किंग की ओर चले गए।वहाँ बहुत सारे ऑटो लाइन में खड़े थे। ऑटो वाले जोर-जोर से आवाज लगा रहे थे—“कटनी बाईपास…!”“मधु नगर… मधु नगर चलो…!”इतने में नर्स गुड़िया बोली—“ठीक है, मैं मधु नगर जा रही हूँ। वहीं मैं एक कमरा लेकर रहती हूँ। अब मैं यहीं से चली जाऊँगी। बाय, फिर कभी मुलाकात होगी।”इतना सुनते ही अंकिता तुरंत बोली—“ठीक है, लेकिन अपना नंबर तो दे दीजिए। अगर पास में न मिल सके तो कम से कम फोन पर बात तो