इश्क और इस्तीफा - 7

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कमरे के अंदर की हवा में बरसों से कैद सन्नाटा अब काव्या की सिसकियों और विराज की भारी सांसों से टूट रहा था। विराज का वह कठोर चेहरा, जो ऑफिस में फाइलों और लैपटॉप के पीछे छिपा रहता था, आज कांच की तरह दरक चुका था। उसने अपनी कांपती उंगलियों से पालने के पास रखी एक छोटी सी गुड़िया को छुआ।"इसे अनन्या बहुत पसंद करती थी," विराज की आवाज़ में वह कड़वाहट अब नहीं थी, जिसे काव्या ने सुबह नाश्ते की मेज पर महसूस किया था। "मैं हर रात इस कमरे के दरवाजे पर आकर खड़ा होता था, पर अंदर