वरदान - 8

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माँ अपने बेटे को गोद में उठा कर दौड़ती रही उसे पता ही नहीं था कि वो कहा जा रही है।पीछे पड़े सैनिक ओर आगे भयानक जंगल ।उसे आगे का रास्ता ही नहीं पता था ।वो भागती रही, जब तक एक उफनती हुई नदी के किनारे नहीं पहुँची। लहरें गरज रही थीं, मानो स्वर्ग भी उनकी पीड़ा सुन रहा हो। पीछे से बड़ी रानी के सैनिकों की मशालें पास आती जा रही थीं।छोटी रानी ने अपने नन्हे बेटे को कसकर सीने से लगा लिया। उसकी आँखों में निराशा चमक रही थी। मेरे लाल… अगर आज इन निर्दयी  हाथों ने हमें पकड़