शुरू करने से पहले एक शेर याद आता है।ऐसे रिश्तों के लिए, जिनकी कोई परिभाषा नहीं होती—Gulzar“दिल में कुछ रिश्ते ऐसे भी होते हैं,जिनका नाम नहीं होता…पर एहसास उनकी मौजूदगी काहर वक्त होता है।धीरे-धीरे राघव बदलने लगा। पहले जहाँ संस्कार की बातें उसे अच्छी लगती थीं, अब वही बातें उसे कभी-कभी दिखावा लगने लगीं। संस्कार को यह बदलाव महसूस हो रहा था, लेकिन उसे समझ नहीं आ रहा था कि ऐसा क्यों हो रहा है। एक दिन ऑफिस में एक छोटी सी बात पर दोनों के बीच बहस हो गई। बात बहुत बड़ी नहीं थी, लेकिन उस दिन पहली बार