लेखक -एसटीडी मौर्य ️कटनी मध्य प्रदेश मैं अपने कमरे में गया और फ्रेश हो गया।फ्रेश होने के बाद मैं और मेरी बहन अंकिता, दोनों प्रियांशी के कमरे की ओर चल पड़े। वहाँ पहुँचकर हमने दरवाज़े के बाहर से आवाज़ लगाई—“कोई है घर में?”हमने दो-तीन बार इसी तरह पुकारा।कुछ देर बाद दरवाज़ा खुला और सामने प्रियांशी का छोटा भाई खड़ा था।वह हमें देखकर थोड़ा हैरान हुआ और पूछने लगा—“आप लोग कौन हैं?”अंकिता मुस्कुराकर बोली—“मैं प्रियांशी की सहेली हूँ। मैं कटनी से आई हूँ। पहले मैं उनके पुराने घर गई थी, लेकिन वहाँ कोई नहीं था। इसलिए मैं इतनी दूर उससे मिलने चली