Maharana Pratap - Chapter 6

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कुछ दूरी पर खड़े कुँवर प्रताप शांत स्वर में बोले“मीरा माँ के मंदिर का मार्ग विश्वास और धैर्य से मिलता है।”जलाल क्रोध से उनकी ओर मुड़ा“हमें उपदेश मत दीजिए! आपको लगता है सब कुछ धैर्य से मिलता है? हमें भी नसीहत देना आता है… बस हमारा तरीका थोड़ा अलग है।”अनेक प्रहार करने के बाद भी वे लोग मीराबाई का कुछ बिगाड़ न सके।राजपुरोहित जी की बात सुनकर कुँवर प्रताप प्रसन्न होकर बोले,“वाह, पुजारी जी! यह सुनकर ही आनंद आ गया। इसे कहते हैं   जैसे को तैसा। उन्होंने मीरा माँ को मारने के कितने ही प्रयास किए, परंतु वे सब के