कमरे के भीतर का दृश्य देखकर काव्या सुन्न खड़ी थी। वह चीख जो उसके मुँह से निकली थी, अब कमरे की भारी ख़ामोशी में कहीं खो गई थी। कमरे की दीवारों पर बने रंग-बिरंगे कार्टून और बिस्तर पर रखी वह अधूरी गुड़िया चीख-चीख कर किसी की मौजूदगी का अहसास करा रहे थे। ऐसा लग रहा था मानो वक़्त यहाँ ठहर गया हो।विराज, जो अब तक पत्थर बना खड़ा था, अचानक टूट सा गया। वह धीरे से कमरे के बीच रखे छोटे से पालने के पास जाकर बैठ गया। उसके हाथ कांप रहे थे। "यह अनन्या का कमरा है," उसने दबी