डबल गेम: मर्यादा वर्सेस मक्कारी - 23

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आधी रात के उस सन्नाटे में, जब भूपेंद्र और काया एक-दूसरे के वजूद में खोए हुए थे, अचानक पास के कमरे से मनोरमा देवी के ज़ोर-ज़ोर से खांसने की आवाज़ गूँजी। वह आवाज़ किसी बर्फीले पानी के झोंके की तरह थी। दोनों झटके से अलग हुए। काया ने थरथराते हाथों से अपनी साड़ी संभाली और भूपेंद्र ने तेज़ी से अपनी टी-शर्ट ठीक की।मनोरमा के खांसने की आवाज़ थम गई, लेकिन रसोई में अब एक भारी अधूरापन पसरा था। भूपेंद्र की आँखों में अब भी वही प्यास थी और काया के चेहरे पर घबराहट के साथ एक अजीब सी कसक। बिना