विंध्याचल के घने जंगलों के बीच एक छोटी सी कुटिया थी, जहाँ माधवन नाम का एक युवक रहता था। माधवन की भक्ति ऐसी थी कि लोग कहते थे उसके 'नारायण-नारायण' पुकारने पर पक्षी भी चहकना बंद कर देते थे। वह निष्पाप था, कोमल था। पर नियति के गर्भ में उसके पिछले जन्मों का एक ऐसा भयानक ऋण छिपा था, जिसका हिसाब अब शुरू होना था।एक रात, जब माधवन ध्यान में लीन था, पहाड़ी धंसी और उसके घर पर पत्थर गिर पड़े। उसकी बूढ़ी माँ और छोटी बहन, जो उसकी पूरी दुनिया थे, उसकी आँखों के सामने मलबे में दब गए।