महाराणा प्रताप - 2

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कुंभलगढ़ किले की प्राचीरों के भीतर सुबह की ठंडी हवा चल रही थी। महल के विशाल आँगन में छोटे छोटे बच्चे दौड़ रहे थे, लेकिन उनमें से कोई भी उस छोटे राजकुमार की तरह दृढ़ और निडर नहीं था। बालक महाराणा प्रताप अब पाँच साल का हो चुका था। उसके चेहरे पर बाल-सुलभ मासूमियत के साथ-साथ आत्मविश्वास की झलक थी, जो किसी साधारण बच्चे में नहीं होती।आज महल में एक विशेष दिन था। राजकुमार के गुरु और सेनापति ने निर्णय लिया था कि अब प्रताप को पहली बार तलवार और धनुष का प्रशिक्षण दिया जाए। यह केवल खेल नहीं था;