अधूरी धुन - 1

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भाग 1: 'रिदम कैफे' और वो अधूरी शामशहर की शोर-शराबे वाली गलियों के बीच एक छोटा सा कोना ऐसा था, जहाँ वक्त जैसे ठहर सा जाता था। 'रिदम कैफे'—पुरानी ईंटों की दीवारें, पीली मद्धम रोशनी और हवा में तैरती ताज़ा पिसी हुई कॉफी की खुशबू। यहाँ आने वाले लोग अक्सर अपनी थकान छोड़ने आते थे, लेकिन आर्यन यहाँ अपनी रूह को ढूंढने आता था।आर्यन पेशे से एक सफल आर्किटेक्ट था। वह कंक्रीट की इमारतों में जान फूंकने का हुनर रखता था, लेकिन उसका अपना दिल संगीत के तारों में बसता था। हर शाम, ऑफिस की फाइलों और ब्लू-प्रिंट्स से पीछा