मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 32

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हवेली का खामोश पहरेदारअरावली की पहाड़ियों के बीच बसा 'निलयपुर' एक ऐसा गांव था, जहां सूरज ढलते ही सन्नाटा अपनी चादर बिछा देता था। गांव के छोर पर एक पुरानी हवेली खड़ी थी—‘रायजादा हवेली’। सफेद संगमरमर से बनी यह इमारत अब काली पड़ चुकी थी और उसके चारों ओर उग आई कटीली झाड़ियां ऐसी लगती थीं जैसे किसी ने हवेली को कैद कर रखा हो।गांव वाले कहते थे कि उस हवेली में वक्त ठहर गया है। वहां रहने वाला आखिरी वारिस, कुंवर विक्रम सिंह, चालीस साल पहले एक रात रहस्यमयी तरीके से गायब हो गया था। उसके बाद जो भी