दिल ने जिसे चाहा - 32

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अगली सुबह…सुबह की हल्की धूप खिड़की से होकर कमरे में उतर रही थी।मयूर सर देर तक जागते रहे थे रात भर… आँखें बंद होतीं तो एक ही चेहरा सामने आ जाता—रुशाली का।उसकी मुस्कान… उसकी आँखों की वो गहराई… और कल की मुलाक़ात…सब कुछ जैसे दिल में फिर-फिर कर चल रहा था।उन्होंने धीरे से आँखें खोलीं और मन ही मन कहा—"अब और देर नहीं… अब बात करनी ही होगी…"थोड़ी देर बाद वे बैठक में पहुँचे।माँ चाय बना रही थीं… पिताजी अख़बार पढ़ रहे थे।“पिताजी… मुझे आपसे कुछ ज़रूरी बात करनी है,” मयूर सर ने शांत लेकिन गंभीर आवाज़ में कहा।पिताजी ने अख़बार