एपिसोड 8: गिल्ट, घाव और अनसुनी चीखेंकमरे की खामोशी ज़ोया को काटने को दौड़ रही थी। बाहर पहरा था और अंदर वह खुद के ही खयालों में कैद थी। ज़ोया ने खिड़की की उन लोहे की जालियों को छुआ जो अभी-अभी उसके पिता ने लगवाई थीं। उसे रह-रहकर अज़ीम का वह चेहरा याद आ रहा था जब बुलडोजर उसकी दुकान के सामने खड़ा था।"यह सब मेरी वजह से हुआ..." ज़ोया ने सिसकते हुए खुद से कहा। उसे एक गहरा गिल्ट (पछतावा) खाए जा रहा था। उसे लग रहा था कि अगर वह अज़ीम की ज़िंदगी में न आती, तो आज