अधूरा प्यार - 3

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मल्होत्रा हाउस में आज अजीब सी खामोशी थी।बाहर सब सामान्य दिख रहा था —सिक्योरिटी दोगुनी कर दी गई थी…सीसीटीवी हर कोने पर लगे थे…गार्ड्स चौबीस घंटे तैनात थे…लेकिन मीरा मल्होत्रा का दिल कह रहा था —खतरा दीवारों के बाहर नहीं… अंदर है।सुबह के पाँच बजे थे।मीरा मंदिर में बैठी थीं।घंटी की हल्की आवाज़ पूरे घर में गूँज रही थी।उनके हाथ काँप रहे थे।“भगवान… मेरी बेटी को बचा लेना,” उनकी आँखों से आँसू गिर पड़े।उन्होंने पिछले दो साल में नव्या को धीरे-धीरे पत्थर बनते देखा था।पहले वो हँसती थी…जिद करती थी…माँ की गोद में सिर रखकर सपने सुनाती थी।अब…उसकी आँखों में