अधूरा प्यार - 1

मुंबई की चमकती ऊँची इमारतों में से एक — “नव्या ग्लोबल कॉर्प” का हेडक्वार्टर।शीशे की दीवारों से ढका वो टॉवर शहर की ताकत और महत्वाकांक्षा का प्रतीक था।और उसकी सबसे ऊपरी मंज़िल पर बैठी थी — नव्या मल्होत्रा।सिर्फ अट्ठाईस साल की उम्र में वो देश की सबसे तेज़ी से उभरती बिजनेस वीमेन बन चुकी थी।उसकी आँखों में अब सपने नहीं — सिर्फ लक्ष्य थे।दिल में अब मोहब्बत नहीं — सिर्फ रणनीतियाँ थीं।लेकिन हमेशा ऐसा नहीं था।दो साल पहले…नव्या प्यार में डूबी हुई एक साधारण लड़की थी।उसके लिए दुनिया का मतलब था — ऋषभ।ऋषभ कपूर।वो लड़का जो उसकी मुस्कान का कारण