रमेश: - “जल्दी!! अंदर ले चलो!!”आदित्य ने हल्के से जानवी को अपनी बाँहों में उठाया, पर उसके उठते ही जानवी की कमजोर साँस एक पल को रुक-सी गई।आदित्य डर गया।आदित्य: - “जानवी!!! नहीं— नहीं— देखो मेरी तरफ! आंखें खोलो!!”उसने उसे कार की बैक सीट पर लेटाया और खुद उसके साथ बैठ गया। रमेश ने कार पूरी स्पीड में दौड़ा दी।बारिश की बूंदें कार की खिड़की पर पड़ रही थीं और जानवी का खून सीट पर फैल रहा था , आदित्य ने उसके चेहरे से खून मिटाया,उसके सर को अपनी गोद में रखा।आदित्य (टूटते हुए): - “जानवी… सुन रही हो न?