बिल्ली जो इंसान बनती थी - 9

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शानवी अब उसे सिर्फ प्यार से नहीं देखती थी…वो उसे ध्यान से देखने लगी थी। हर हरकत। हर प्रतिक्रिया। हर नज़र।और ये बात…कार्तिकेय समझ चुका था।उस रात…कमरे में अजीब सी चुप्पी थी। शानवी बिस्तर पर बैठी थी। उसकी आँखें बिल्ली पर टिकी थीं।वो अचानक बोली —अगर तुम सच में इंसान होते ना…तो शायद… ऐसे ही देखते…।कार्तिकेय के भीतर कुछ काँप गया। उसने तुरंत नज़रें फेर लीं।लेकिन उसकी सांसें तेज़ हो चुकी थीं। बेचैनी बढ़ती गई जब शानवी पास आती  उसका दिल असामान्य रूप से तेज़ धड़कने लगता। जब वो उसे गोद में लेती  उसे डर लगता कहीं वो उसकी धड़कन