वृक्ष वाणी : पर्यावरण सिद्धों का उदय - 3

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स्कूल की घंटी बजी। अर्जुन और किरण स्कूल के बाहर आइसक्रीम की दुकान के पास खड़े थे। शांतप्पा की दुकान—जो मलनाड में अपनी मशहूर कुल्फी के लिए जानी जाती थी।"दो मैंगो कुल्फी," किरण ने कहा।अर्जुन ने अपनी स्केचबुक निकाली और पेड़ की छांव में बैठकर कुछ उकेरने लगा। पिछले दो दिनों से वह बहुत चिंतित था। विक्रम की वह जिज्ञासु नज़र... उसे कितना पता चल गया था?"ओए, क्या मैं तुम लोगों को जॉइन (Join) कर सकता हूँ?"दोनों ने सिर उठाकर देखा। विक्रम वहां खड़ा था, एक दोस्ताना मुस्कान के साथ। उसके हाथ में बैडमिंटन रैकेट था—लगता था वह खेल कर