भक्त प्रह्लाद - 2

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हिरण्याक्ष का उत्थान एवं पतनजब से सृष्टि-चक्र आरंभ हुआ, तभी से पुण्य व पाप का इतिहास-चक्र भी अपने अंदर अनेक रहस्य समेटे हुए निरंतर अबाध गति से चलायमान है। जिस प्रकार अच्छाई और बुराई आरंभिक काल से विद्यमान हैं, उसी प्रकार देव और असुर भी आदिकाल से आपस में संघर्ष करते चले आए हैं।देवों और असुरों के पिता भगवान् कश्यप थे। उनकी अनेक पत्नियाँ थीं, जिनमें अदिति से देवों ने और दिति से असुरों ने जन्म लिया।सतयुग का समय था। भूमंडल में पुण्य का प्रताप अधिक और पाप का प्रकोप कम था। चहुँओर शांति और समृद्धि का साम्राज्य था। प्राणियों