Hunted Train Station

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 Hunted train stationSanjay Kamble जोर पकड़ चुकी बारिश की बूंदें खिड़की की टूटी जाली से आते हुए कमरे की हवा में एक ठंडा सा भय घोल रही थीं। बाहर कुत्तों की रूदन भरी आवाजें, और बीच-बीच में सुनाई देती उल्लू की 'हू... हू...' रात को और डरावना बना रही थी।यह कमरा, जो एक छोटा सा ऑफिस था, अब एक अपराध का गवाह बन चुका था।दरवाजे के पास एक पुरानी लकड़ी की कुर्सी टूटी पड़ी थी, जिस पर खून के छींटे साफ नज़र आ रहे थे। फर्श पर कागज़ बिखरे थे, कुछ फटे हुए, कुछ खून से सने। एक कोने में एक