जब भूपेंद्र को पता चला कि वंशिका की तबीयत खराब है, तो वे परेशान तो हुए, लेकिन उससे कहीं ज्यादा वे काया की तत्परता देखकर गदगद हो गए। उन्होंने देखा कि काया कैसे एक साथ तीन मोर्चों पर लड़ रही है—वह रसोई संभाल रही थी, बच्चों को देख रही थी और वंशिका की तीमारदारी भी कर रही थी।भूपेंद्र ने ऑफिस जाने से पहले काया को कमरे के बाहर बुलाया। "काया, मैं सच में धन्य हूँ कि तुम जैसी मददगार हमारे घर में है। इस मुश्किल वक्त में अगर तुम न होती, तो पता नहीं हमारा क्या होता। वंशिका खुशकिस्मत है कि