43 – ------ ‘कमाल ही है !’ यह सब पढ़ते हुए अनामिका के चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई | हमारे यहाँ तो शादियों में एक-दूसरे के साथ सजने का कॉमपिटिशन चलता है | भला यह क्या बात हुई कि सजना–सँवरना भी किसी नियम के तहत हो !लेकिन जो है, सो है –वह आगे जानने के लिए और भी उत्सुक हो उठी – रंजु ने इसमें जापान के उपहारों के बारे में लिखा था, वह आगे पढ़ने लगी-- “जापानी लोग उपहार लेन-देन को बहुत पसंद करते हैं।जापान में साल में दो बार उपहार देने का सीज़न होता है। गर्मियों में इसे