प्रेम न हाट बिकाय - भाग 31

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31---      पता चला अगले दिन ही शीनोदा साहब बस से कोटा के लिए निकल गए |  दो दिन वहाँ रहकर वह वापिस आया  |  तीसरे दिन दोनों लड़के फिर आना व विवेक के सामने थे | “कहिए, क्या रहा बरखुदार !”विवेक ने शीनोदा से पूछा | “क्या बार ---बार ---” बेचारा सकपका गया | “कुछ नहीं शीनोदा ----ये तो ऐसे ही ---“आना चाहती थी कि वह अपनी कोटा की बात सुनाए वरना इसी सब में उलझकर रह जाएगा |  “बट –क्या बोले मि.गौड?” बड़ा उलझन में पड़ गया था एक शब्द से--- “बोर मत कर शीनोदा, बताओ वहाँ