26 - होली के दिन धूप से खिलते चेहरे वाला शीनोदा होलिका-दहन के पास खड़ा था | सोसाइटी से बाहर सड़क पर धू-धू करती होली की लपटों से निकलने वाले प्रकाश में उसका चेहरा लाल-भभूका हो रहा था | मज़े की बात यह कि केवल वही नहीं, उसके साथ विवेक, दृष्टांत व अनिल भी एक कतार में खड़े थे | “मम्मा ! देखो शीनोदा अंकल ----”दृष्टि ने माँ का ध्यान उनकी ओर दिलवाया | ओह ! पूरी पलटन पधारी है ! अभी तो वह घर से बड़बड़ करती निकली थी, बाप-बेटे दोनों सुस्ती में पड़े