शहर की वो रात बाकी रातों से अलग थी।आसमान पर चाँद था, मगर उसकी रोशनी में सुकून नहीं, एक अजीब-सी बेचैनी घुली हुई थी। जैसे चाँद भी किसी राज़ का बोझ ढो रहा हो। सड़कें सुनसान थीं और हवा में एक ठंडी सी नमी थी, जो इरा की त्वचा से टकराकर उसके दिल तक उतर रही थी।टैक्सी के रुकते ही इरा ने सामने देखा—पुरानी, ऊँची और डरावनी हवेली।उसकी खिड़कियाँ काली आँखों की तरह घूर रही थीं।“यहीं है मैडम,” ड्राइवर ने कहा, जैसे जल्दी से वहाँ से निकल जाना चाहता हो।इरा ने सिर हिलाया, किराया दिया और टैक्सी जाते हुए देखती