25-- यदि विवेक शहर में होते तब शाम के समय चाय पीने शीनोदा रोज़ाना आ ही जाता | विवेक अँग्रेज़ी बोलते-बोलते हिन्दी में बात करने लगते और शीनोदा हिन्दी में बोलता हुआ अँग्रेज़ी में ! जब यह बात पकड़ में आती तब खूब ठठाकर हँस पड़ते सब |बहुत अच्छी हिन्दी बोलने लगा था शीनोदा ! बस, थोड़े उच्चारण में स्वाभाविक बदलाव होता | बात समझने में कोई परेशान नहीं होती थी, कोई ‘कम्युनिकेशन गैप’ नहीं था | विवेक को उसके साथ खूब आनंद आने लगा था |इन दोनों के पीछे शीनोदा और बच्चों ने एक-दूसरे को भाषा का