15 --- जब तक अनु मयंक के साथ ड्राइवर के सामने से निकलकर चाय की लारी –(ठेले) पर पहुँची तब तक तिगड़ी पीछे के रास्ते से वहाँ पहुँचकर चाय का आर्डर दे चुकी थी | पास ही सैंडविच की लारी भी खड़ी रहती थी जिस पर ताज़े-ताज़े भिन्न भिन्न प्रकार के स्वादिष्ट सैंडविच बनते रहते | उनका भी ऑर्डर दिया जा चुका था | बस, प्रतीक्षा थी उन चीज़ों के तैयार होकर उनके सामने आने की | उन पर टूटना तो बनता ही था | सबको भूख लगी थी और टिफ़िन उनके कमरों में ही रखा था