13-- आज इस गर्ल्स हॉस्टल के प्राँगण में खड़ी अनामिका को मोटे मास्टर जी याद आए और उसके चेहरे की मुस्कान गहरा गई | वह सोच में पड़ गई, बहुत कठिन था बच्चों को घर में सुबह ताले में बंद छोड़कर आना | समय भी कम था, उसे निर्णय लेना था और विवेक भी शहर में नहीं थे | उसे पूर्णिमा भाभी की याद आ गई, वो होतीं तो --- शीघ्र निर्णय न लेने से उस वर्ष प्रवेश न मिलता और उसका वह वर्ष खराब हो जाता, वैसे ही उसने जीवन के कितने