कहानी न जाने क्या हुआ है आज सपना को कि सुबह से आँखें बरसे ही जा रही हैं हालाँकि मौसम बारिश का है लेकिन आसमान बिलकुल खुला हुआ है बादल एक बार भी झूम कर नहीं बरसे हैं धरती तप रही है सूरज आग उगल रहा है हरियाली पीली हो रही है पंछियों को देखो कैसे गर्मी से व्याकुल हैं और मोर नाचना भूल कर एक कोने में बैठे हैं बरखा के इन्तजार में, कि बारिश आये और वे अपने खूबसूरत पंख फैला कर नाचे लेकिन इस सूखे हुए मौसम में सपना की आँखों में बाढ़ सी आयी