सीमाओं से परे

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सुबह की हल्की धूप खिड़की से कमरे में आ रही थी।राधा की नींद सबसे पहले खुली।उसने करवट लेकर सीमा की तरफ देखा।सीमा अभी भी सो रही थी — लेकिन उसके चेहरे पर एक अलग सी शांति और हल्की चिंता दोनों साथ दिख रही थीं।राधा धीरे से उठी और खिड़की के पास जाकर खड़ी हो गई।बाहर गली में रोज़ की तरह लोगों की आवाज़ें शुरू हो चुकी थीं।तभी माँ की आवाज़ आई —“राधा… उठ गई क्या? आ जा, चाय बना ली है।”राधा नीचे आ गई।रसोई में माँ चाय डाल रही थीं, और पापा अख़बार पढ़ रहे थे।घर का माहौल आज थोड़ा