शीशी अब उलझन में थी कि वह रिज़ा की सुने या सक्का की। उसने सोचा कि दोनों की बात सुनने में कोई समझदारी नहीं बल्कि बेवकूफी होगी, क्योंकि वह उस वक्त किसी पर भरोसा नहीं करना चाहती थी। उसने खुद की सुनी; उसके दिल ने उसे जो करने के लिए कहा, उसने वही किया।शीशी का यह कदम दिखाता है कि वह अब मानसिक रूप से कितनी मजबूत हो गई है। जब कोई हमें धोखा देता है, तो अक्सर हम दूसरों के मशवरों में और भी उलझ जाते हैं। ऐसे में "खुद की सुनना" ही सबसे सही रास्ता होता है।शीशी ने