स्वधर्म संदेश - 2

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                               Part 2                            यही वेदान्त 2.0 की धारा है।      कबीर के उदाहरण (ईश्वर, गुरु, “मैं”, सत्य)  1️⃣  ईश्वर भीतर है “मोको कहाँ ढूंढे रे बंदे, मैं तो तेरे पास में।ना मंदिर में, ना मस्जिद में, ना काबे कैलाश में।” अर्थ:ईश्वर बाहर नहीं, अनुभव भीतर है — वही बात जो तुम कह रहे हो। 2️⃣ गुरु दर्पण है “गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागूँ पाय।बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय।”