मैं तीस साल बाद उसी समुद्र तट पर खड़ी थी, और लहरें मेरे पैरों को वैसे ही छू रही थीं जैसे उस गर्मी में छूती थीं जब मैं सत्रह की थी। रेत अब भी उतनी ही सुनहरी थी, लेकिन मैं वह लड़की नहीं रही जो यहाँ से भागकर शहर चली गई थी, अपने दिल के टुकड़े इसी किनारे पर छोड़कर। मेरे हाथ में वकील का लिफाफा था। "आपकी नानी ने आपके लिए समुद्र के किनारे वाला घर छोड़ा है, सुश्री मीरा। लेकिन एक शर्त है - आपको तीस दिन वहीं रहना होगा। अकेले।" तीस दिन। उसी गाँव में जहाँ से