Maharana Pratap - Chapter 2

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राजमहल के सभा-कक्ष में सन्नाटा पसरा था। कुंवर प्रताप हल्की सी मुस्कान के साथ बोले,“दाजीराज, मीरा माँ … घर वापस कब आती थी?”उनके प्रश्न के साथ ही सबकी नज़रें एक साथ राणा उदय सिंह जी की ओर मुड़ गईं।कुँवर प्रताप, अपने उत्तर की प्रतीक्षा करते हुए, शांत भाव से पिता की ओर देखने लगे।राणा उदय सिंह ने कुछ पल मौन साधा, फिर धीमे स्वर में बोले  “नहीं लौटती थी, प्रताप। क्यों लौटती?इतने अपमान और कठोरता से भरे संसार में उसके लिए क्या था?“उसका दिव्य स्वभाव इस राजमहल की कठोर रीतियों के बोझ मर्यादाओं में घुट गया था…”इतना कहकर राणा उदय