राजमहल की अंतरकथामेवाड़ के राजमहल का एक शांत कक्ष — ऊँची छतों पर टंगे दीपकों की हल्की लौ में झिलमिलाती परछाइयाँ जैसे इतिहास की परतें खोल रही थीं।रानी जयवंता बाई धीरे-धीरे एक बड़ा सा संदूक खोलती हैं। अंदर रखे हैं शाही वस्त्र, मणि-मोती जड़े आभूषण और सुगंधित रेशमी कपड़े।यह देखकर कुँवर प्रताप विस्मय से बोले “रानी माँ, हम आपसे अपने मीरामाँ के बारे में जानना चाहते हैं। ये शाही वस्त्र और ये आभूषण… क्या ये उन्हीं के हैं?जब हम उनसे मिले थे, तो वे तो भक्ति और सादगी की मूर्ति प्रतीत हुईं। इन्हें देखकर तो लगता है जैसे वे किसी भिन्न