सीमाओं से परे

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“राधा… ज़रा धीरे चल बेटी…”माँ हाँफती हुई पीछे से बोली।“तेरे कदमों में अभी जवानी की रफ्तार है… पर मैं अब 25 की नहीं रही… थोड़ा साथ चल ले।”आज माँ राधा को साथ लेकर बाज़ार आई थी।कुछ ही दिन पहले राधा की कॉलेज की परीक्षाएँ खत्म हुई थीं। अब वह 21 साल की हो चुकी थी और उसकी छुट्टियाँ चल रही थीं।माँ ने सोचा — चलो, आज इसे सब्ज़ी खरीदना भी सिखा देती हूँ।लेकिन माँ को जल्दी ही समझ आ गया कि सब कुछ उल्टा हो रहा है।राधा का ध्यान सब्ज़ियों की तरफ बिल्कुल नहीं था।वह कभी इधर-उधर की दुकानों को