डबल गेम: मर्यादा वर्सेस मक्कारी - 5

रात के दस बज चुके थे। बच्चों को सुलाने के बाद काया ने पूरे घर का चक्कर लगाया। ड्राइंग रूम की लाइट बंद की, बिखरे हुए खिलौने समेटे और फिर रसोई की ओर बढ़ी। अमूमन इस वक्त तक घर में एक खुशनुमा शांति होती थी, लेकिन आज की शांति भारी थी। भूपेंद्र साहब और वंशिका दीदी के बीच हुई वह बहस हवा में अब भी तैर रही थी।काया ने अपनी छोटी सी डायरी निकाली जिसमें वह घर के राशन का हिसाब लिखती थी। वह हिसाब लिख तो रही थी, पर उसका ध्यान बार-बार साहब के उस थके हुए चेहरे पर