लाल दाग़

कक्षा में अचानक ठहाकों की आवाज़ गूँज उठी।Sneha ने इधर-उधर देखा तो पाया कि सब बच्चे उसी की ओर घूर-घूरकर देख रहे थे और हँस भी रहे थे।लड़कियाँ Sneha को देख कर अजीब-सी मुस्कान लिए खड़ी थीं, मानो किसी राज़ को पकड़ लिया हो।तभी Sneha को लगा—“क्या सब मेरी बातें कर रहे हैं? ऐसा अचानक क्या हो गया?”वह अभी सिर्फ़ 12 साल की ही तो थी—दुबली-पतली सी, काले घुँघराले बालों में दो चोटी बनाए हुए। उसकी आँखों में मासूमियत झलकती थी और पतले होंठ डर से सिमटे हुए थे।घबराकर उसने पीछे हाथ लगाया तो उसकी उंगलियाँ खून से लाल हो