फिर बादल उठा और ज़ेबा के करीब जाकर बोला, " ज़ेबा हम आपका दर्द सह तो नहीं कर सकते लेकीन आपके साथ हुये जुल्म और सीतम का इंतकाम जरुर ले सकते है. ज़ेबा आज मैं कसम खाता हूँ के आपके साथ और हमारी अवाम के साथ हैवानीयत करनेवाले इस कमीने और उसके साथीयों को उनके अंजाम तक मै जरुर पंहुचाकर ही दम लूँगा. इसके लीये चाहे मुझे फ़ना क्यों ना होना पड़े." तभी ज़ेबा ने बादल के मुंह पर हाथ रख दिया और वह बोली, " नहीं बादल, आपको हमारे लीये जीना है. फ़ना तो उन लोगों को होना है