साये का बसेरा: 'अंधेरपुर' की अभिशप्त हवेली: एक अनचाही यात्रा कबीर एक खोजी पत्रकार था, जिसे रहस्यों को सुलझाने और अलौकिक घटनाओं के पीछे के सच को बेनकाब करने में महारत हासिल थी। वह भूतों पर विश्वास नहीं करता था; उसके लिए 'डर' सिर्फ एक रासायनिक प्रतिक्रिया थी जो दिमाग में होती थी। इसी विश्वास के साथ वह बिहार और नेपाल की सीमा पर स्थित एक छोटे से गांव 'अंधेरपुर' पहुँचा।इस गांव का नाम नक्शे पर तो था, लेकिन वहाँ जाने वाले रास्ते सालों से बंद पड़े थे। गांव के बारे में मशहूर था कि 19वीं सदी में यहाँ के जमींदार