जागती परछाई - 1-2

  • 825
  • 291

Chapter 1 : जो याद नहीं रहना चाहिए था कुछ यादें अचानक गायब नहीं होतीं।वे बस धीरे-धीरे पीछे खिसक जाती हैं, इस तरह कि हमें लगता है हमने ही उन्हें छोड़ दिया है।और जब वे लौटती हैं, तो शोर नहीं करतीं—बस चुपचाप अपनी जगह ले लेती हैं।मैं लिख रही थी।कमरा शांत था, इतना शांत कि पंखे की आवाज़ भी ज़रूरत से ज़्यादा तेज़ लग रही थी। सामने मेज़ पर मेरी डायरी खुली पड़ी थी, जबकि मुझे पूरा यक़ीन था कि आज मैंने उसे खोला नहीं था।मैंने पन्ने पर नज़र डाली।लिखावट मेरी थी—अक्षरों का वही दबाव, वही हल्की तिरछी लकीरें। सब क