वेदान्त 2.0 - भाग 35

धर्म–अर्थ–काम–मोक्ष : एक जीवन-बोध मोक्ष कोई साध्य नहीं है। मोक्ष कोई लक्ष्य नहीं है। मोक्ष कोई उपलब्धि नहीं है।मोक्ष धर्म, अर्थ और काम को जी लेने का परिणाम है।जिसे पाया जा सके, वह मोक्ष नहीं। जिसे साधना से पकड़ा जा सके, वह मोक्ष नहीं। मोक्ष ठीक उसी तरह है जैसे मृत्यु— न चाहो तब भी घटती है, और चाहो तो भी तुम्हारे बस में नहीं।मोक्ष : प्रयास नहीं, फलजब जीवन पूरा जिया जाता है, तो मोक्ष स्वतः फलित होता है।जैसे— दीपक जलाओ, अंधकार हट जाता है।अंधकार हटाने का कोई अलग प्रयास नहीं करना पड़ता। प्रकाश कोई कर्म नहीं— वह दीपक