अस्तित्व मनोहर के मन-मस्तिष्क पर अस्तित्व शब्द ने खलबली मचा दी थी। उसने सुन रखा था कि आपका अस्तित्व ही आपका जीवन है। उसने कई लोगों से इस विषय पर चर्चा की लेकिन उस प्रश्न की जकड़न को वो अब भी महसूस कर रहा था। अस्तित्व के प्रश्न ने कई और प्रश्नों को जन्म दे दिया था, जैसे- सफलता-असफलता और सौभाग्य-दुर्भाग्य। एक स्पष्ट मनोवृति उभर आयी थी कि सफलता मतलब सौभाग्य और असफलता मतलब दूर्भाग्य। एक ओर तो मनोहर ने सुन रखा था कि सौभाग्यवादी पैदा होते हैं और मन के एक कोने में यह बात भी उथल-पूथल मचा रखी