श्रापित एक प्रेम कहानी - 34

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एकांश मन ही मन सोचता है----->" अच्छा तो वो लाल शिला ही रक्षा कवच है। कुछ दैर में सभी उस जगह पर पहुँच जाता है। सभी जल्दी जल्दी उतर कर उस पेड़ के पास जाता है जहां पर रक्षा कवच बनी है। सभी वहाँ जाकर देखता है। तो सभी हैरान रह जाता है। शक्ति शिला वही उसी जगह पर था। आलोक शक्ति शिला को देखकर कहता है--->" अगर शिला यहीं है तो फिर कुंम्भन बाहर कैसे निकल सकता है। तभी एकांश कहता है---->" आलोक क्यों ना हम सब तुम्हारे गांव तरफ जा कर देखे। वहाँ पर भी ऐसे ही शिला है ना। एकांश की बात सुनकर