इश्क के साये में - एपिसोड 12

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अंतिम एपिसोडजहाँ रूह आज़ाद हुईशाम गहराने लगी थी।वर्कशॉप की खिड़की से आती रौशनी अब हल्की और सुनहरी हो चुकी थी,जैसे दिन भी किसी विदाई की तैयारी कर रहा हो।आरव और अनाया आमने-सामने बैठे थे।बीच मेंटूटा हुआ कैनवस रखा था।वह कैनवसजो सिर्फ़ रंगों का टुकड़ा नहीं था,बल्कि दो जिंदगियों का अधूरा सच था।अनाया की आँखें बंद थीं।उसकी साँसें तेज़ थीं।“अब मुझे सब याद आने लगा है,”उसने धीरे से कहा।“डर भी…और सच भी।”आरव ने उसका हाथ थामे रखा।“अगर बहुत भारी लगे,तो रुक सकते हैं।”अनाया ने सिर हिलाया।“नहीं।इस बार नहीं।मैं जानना चाहती हूँकि मैं मरी कैसे थी।”ये शब्द कहते हीकमरा अचानक ठंडा हो